दुनिया में अक्सर लोग अमीरी को सिर्फ़ ज़्यादा माल-दौलत या ऊँचे रुतबे से जोड़ते हैं। लेकिन इस्लाम हमें असल अमीरी का एक बिल्कुल अलग और गहरा मायना समझाता है। आइए जानते हैं कि रसूलुल्लाह ﷺ ने हकीक़त में अमीरी को किससे जोड़ा।
सवाल: हकीक़त में अमीर कौन?
- A. ज़्यादा माल वाला
- B. बड़े रुतबे वाला
- C. बड़े दिल वाला
- D. सही जवाब का इंतज़ार
सही जवाब है: ऑप्शन C , बड़े दिल वाला
तफ़सील (विवरण):
📖 दलील (हदीस से प्रमाण)
रसूलुल्लाह ﷺ ने फ़रमाया:
“अमीरी माल की कसरत से नहीं होती, बल्कि असल अमीरी दिलों का ग़नी होना है।”
📕 सहीह बुख़ारी, किताबुर रक़ाक, हदीस-6081
🕌 सीख और नसीहत
- इस्लाम में अमीरी का मतलब दिल की ग़िना़त यानी क़ना’अत और संतोष है।
- ज़्यादा माल-दौलत रखने वाला हर इंसान अमीर नहीं होता, बल्कि जो इंसान अपने पास मौजूद चीज़ों पर राज़ी और शुक्रगुज़ार हो, वही हकीक़त में अमीर है।
- असली अमीरी बाहरी दिखावे में नहीं, बल्कि अंदरूनी सुकून और दिल की गहराई में है।
✨ निष्कर्ष
दौलत और रुतबा कभी मुकम्मल अमीरी की गारंटी नहीं दे सकते। असली अमीरी वही है जो दिल में हो—संतोष, शुक्र और ग़िना़त। यही अमीरी इंसान को जन्नत की तरफ़ ले जाने वाली है।



