रसूलुल्लाह ﷺ ने किस जगह के लिए फरमाया: “वहाँ ज़लज़ले और फ़ितने होंगे और शैतान का सिंग वहीं से तूलू होगा”?

नबी-ए-पाक ﷺ की कई हदीसों में आने वाले फितनों (परेशानियों) और भूकम्पों का ज़िक्र मिलता है। एक हदीस में आपने ﷺ ने एक ख़ास जगह के बारे में फरमाया —
“वहाँ से शैतान का सिंग उभरेगा और वहीं से फितने उठेंगे।”
आइए जानते हैं, वो जगह कौन-सी है और ये हदीस हमें क्या सिखाती है।

सवाल: रसूलुल्लाह ﷺ ने किस जगह के लिए फरमाया: “वहाँ ज़लज़ले और फ़ितने होंगे और शैतान का सिंग वहीं से तूलू होगा”?

  • A. मुल्क-ए-शाम
  • B. ईरान
  • C. नज्द
  • D. इस्राइल

सही जवाब है: ऑप्शन C , नज्द

तफ़सील (विवरण):

📖 दलील

۞ बिस्मिल्लाह-हिर्रहमान-निर्रहीम ۞

हदीस:
हज़रत अब्दुल्लाह बिन उमर (रज़ि॰) से रिवायत है कि रसूलुल्लाह ﷺ ने दुआ की:

“ऐ अल्लाह! शाम और यमन में बरकत अता फरमा।”

लोगों ने अर्ज़ किया: “हमारा नज्द भी?
आप ﷺ ने फिर वही दुआ दोहराई:

“ऐ अल्लाह! शाम और यमन में बरकत अता फरमा।”

लोगों ने फिर कहा: “हमारा नज्द भी?
तब रसूलुल्लाह ﷺ ने फरमाया:

“वहाँ तो ज़लज़ले और फ़ितने होंगे, और शैतान का सिंग वहीं से तूलू होगा।”

📕 सहीह बुख़ारी, जिल्द 8, हदीस 7094


🕊️ सीख

यह हदीस हमें आगाह करती है कि हर दौर में कुछ जगहों से फितने (परीक्षाएं) और गुमराहियाँ फैलेंगी। इसलिए मुसलमान को चाहिए कि वह इल्म, सब्र और दुआ के साथ अपने ईमान को मज़बूत रखे।

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