मौत का ग़म इंसान की फितरत है, लेकिन इस्लाम ने इस पर एक सीमा निर्धारित की है। जानिए कि इस्लाम में शौक़ (मौत के ग़म) की सही अवधि कितनी है।
सवाल: इस्लाम में शौक़ (मौत के ग़म) की अवधि कितनी है?
- A. 3 दिन
- B. 30 दिन
- C. 40 दिन
- D. सही जवाब का इंतज़ार
सही जवाब है: ऑप्शन A , 3 दिन
तफ़सील (विवरण):
📜 दलील (हदीस)
हदीस:
हज़रत ज़ैनब बिन्ते जह्श (रज़ि.) के भाई का इंतिक़ाल हो गया। 3 दिन के बाद उन्होंने खुशबू मंगवाई और उसे लगाई। फिर कहा:
“मुझे खुशबू की जरूरत नहीं थी, मगर मैंने रसूलुल्लाह ﷺ से सुना कि जो औरत और मर्द अल्लाह तआला और क़यामत पर ईमान रखते हों, उनके लिए हलाल नहीं कि 3 दिन से ज़्यादा किसी मय्यत पर शौक़ करें, सिवाय शौहर के, जिसका शौक़ 4 महीने 10 दिन है।”
📚 सुन्नन अन-नसाई, हदीस 3533b
🕌 सबक और तफ़सीर
- मौत का ग़म इंसानी फितरत है, लेकिन इस्लाम में हद तय की गई है।
- किसी रिश्तेदार के लिए 3 दिन से अधिक शौक़ करना जायज़ नहीं।
- केवल शौहर के लिए पत्नी का शौक़ 4 महीने 10 दिन है।
- इस हिदायत से इंसान को सब्र और संयम सीखने का अवसर मिलता है।
🤲 दुआ
- ऐ अल्लाह! हमें अपने हुक्म पर अमल करने की तौफ़ीक़ अता फ़रमा।
- हमारे गुजर चुके अहबाब की मग़फ़िरत फरमा।
- हमें अपने ग़म और दुख को सही सीमा में रखने का साहस अता फ़रमा।
आमीन 🌹



