ज़िल-हिज्जाह का महीना हर मुसलमान के लिए बड़े इबादतों और नफ्ल आख़़िरी इबादतों का समय है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि क़ुरबानी की नियत रखने के बाद कौन सी चीज़ करने से मना किया गया है?
सवाल: ज़िल-हिज्जाह का चाँद देखने के बाद क़ुरबानी की नियत रखने वाले को क्या करने से मना किया गया है?
- A. सफ़र करना
- B. बाल और नाख़ून काटना
- C. रोज़ा रखना
- D. सही जवाब का इंतज़ार
सही जवाब है: ऑप्शन B , बाल और नाख़ून काटना
तफ़सील (विवरण):
📜 दलील (हदीस से)
हदीस:
“जब तुम ज़िल-हिज्जाह का चाँद देख लो और तुम में से कोई शख़्स क़ुरबानी करने का इरादा रखता हो तो वह अपने **बालों और नाख़ूनों को (ना काटे) अपने हाल पर रहने दे।”
📕 सहिह मुस्लिम: 1977
🕌 सबक और तफ़सीर
- क़ुरबानी की नियत रखने के बाद बाल और नाख़ून काटने से मना किया गया है।
- इसका मक़सद इरादे की पवित्रता बनाए रखना और इबादत की तैयारी में दिल को केंद्रित रखना है।
- यह हमें याद दिलाता है कि हर इबादत का नियत और इरादा साफ़ होना चाहिए, तभी उसका आध्यात्मिक फ़ायदा होता है।
🤲 दुआ
- ऐ अल्लाह! हमारी क़ुरबानी की नियत को सिर्फ़ तेरी रज़ा के लिए क़बूल फ़रमा।
- हमें हमारी इबादत में सच्चाई और नेक नियत अता फ़रमा।
- हमारे दिल और इरादों को हमेशा पाक और तेरे हुक्म के अनुसार बनाए रख।
आमीन 🌹



