क़ुरआन मजीद में अल्लाह तआला ने इंसान को आख़िरत की हक़ीक़त समझाने के लिए कई जगहों पर बेहद गहरी और सोचने वाली तश्बीहें (उदाहरण) दी हैं। उन्हीं में से एक तश्बीह है — “कअन्नहु जिमालतुन सुफ़र” यानी “जैसे वो पीले ऊँट हों।”
आइए जानते हैं कि यह उदाहरण किस चीज़ के लिए दी गई है।
सवाल: अल्लाह ने क़ुरआन में फ़रमाया “कअन्नहु जिमालतुन सुफ़र”— यह किस चीज़ के लिए तश्बीह दी गई है?
- A. दोज़ख़ की आग
- B. जन्नत की हूर
- C. पुल सिरात की ऊँचाई
- D. दोज़ख़ के फ़रिश्ते
सही जवाब है: ऑप्शन A , दोज़ख़ की आग
तफ़सील (विवरण):
📜 दलील :
۞ बिस्मिल्लाह हिर्रहमान निर्रहीम ۞
अल-क़ुरआन:
“(काफ़िर से कहा जाएगा) चलो उस साये की तरफ जो तीन शाखों वाला है, जो न ठंडक देगा और न आग की लपट से बचा सकेगा। उससे ऐसी चिंगारियाँ निकलेंगी जैसे महल, और जैसी पीले ऊँट।”
इससे मालूम होता है कि यह तश्बीह दोज़ख़ की आग के लिए दी गई है — यानी उसकी लपटें और चिंगारियाँ इतनी बड़ी और डरावनी होंगी कि वो ऊँटों की तरह तेज़ और भयानक दिखाई देंगी।
📖 सूरह अल-मुर्सलात (77), आयत 29–34



