वो कौन सा अमल है जिसके करने से इंसान को अल्लाह तआला 100 साल के बराबर जहन्नुम से दूर कर देगा?
हर नेक अमल का इंसान को दुनिया और आख़िरत में बड़ा इनाम मिलता है। लेकिन कुछ ख़ास अमल ऐसे हैं जिनकी फ़ज़ीलत इतनी अज़ीम है […]
नमाज़, रोज़ा, ज़कात और हज जैसे इबादत से जुड़े सभी सवाल और जवाब।
हर नेक अमल का इंसान को दुनिया और आख़िरत में बड़ा इनाम मिलता है। लेकिन कुछ ख़ास अमल ऐसे हैं जिनकी फ़ज़ीलत इतनी अज़ीम है […]
क़ुरान-ए-करीम अल्लाह की किताब है जिसमें हर आयत इंसानों के लिए रहनुमाई और सबक़ है। कुछ सूरहों में आयात का बार-बार दोहराया जाना हमें गहरी
क़ुरान-ए-करीम में वो कौन सी सूरह है जिसमें एक ही आयत-ए-करीमा 31 बार आई है? जवाब देखे »
क़ुरान को याद करना बहुत बड़ा शरफ़ है, लेकिन इसे संभालकर रखना और उसकी हिफ़ाज़त करना उससे भी ज़्यादा अहम है। नबी-ए-करीम ﷺ ने हाफ़िज़-ए-क़ुरान
क्या आप जानते हैं कि अल्लाह तआला हर रात अपने बंदों से ख़ास अंदाज़ में रहमत और मग़फिरत की पुकार करता है? ये कोई एक
शब-ए-क़द्र (लैलतुल क़द्र) इस्लाम की सबसे मुबारक रातों में से एक है। यह वह रात है जिसमें क़ुरआन-ए-करीम का नुज़ूल हुआ और जिसमें बंदे की
शब-ए-क़द्र को क़ुरआन में किस से बेहतर कहा गया है? जवाब देखे »
ज़कात इस्लाम का एक अहम स्तंभ है जो समाज में बराबरी और रहमत का कारण बनता है। लेकिन जो लोग ज़कात अदा नहीं करते, उनके
क़यामत के दिन गंजे साँप का तौक़ किस शख़्स को पहनाया जाएगा? जवाब देखे »
इस्लाम ने औरतों को इबादत और नेकियों में हिस्सा लेने से नहीं रोका, बल्कि उन्हें भी अल्लाह की रहमत के मौकों पर शामिल होने की
रसोअल्लाह (ﷺ) ने औरतों के ईदगाह जाने के बारे में क्या फरमाया है? जवाब देखे »
इस्लाम में नमाज़ ईमान की पहचान और बंदे के अल्लाह से सीधे रिश्ता रखने का ज़रिया है। लेकिन कुछ नमाज़ें ऐसी हैं जो मुनाफ़िक़ों (दिखावे
वो कौन सी दो नमाज़ें हैं जो मुनाफ़िक़ों पर ज़्यादा भारी हैं? जवाब देखे »
अल्लाह तआला ने इंसान को नेकियों की हिदायत दी है ताकि वो गुनाहों और फितनों से दूर रह सके। लेकिन क्या आप जानते हैं कि
वो कौन सी नेकी है जो इंसान को बेहयाई और बुराई से रोकती है? जवाब देखे »
नमाज़ में जमात का बहुत बड़ा दर्जा है और इसमें पहली सफ़ (लाइन) में खड़े होने वालों के लिए अल्लाह और उसके रसूल ﷺ ने खास फज़ीलत
वो कौन से लोग हैं जिनके लिए रसूलअल्लाह ﷺ तीन मरतबा बख्शिश की दुआ करते थे? जवाब देखे »
जब अज़ान की पुकार गूँजती है, तो यह हमें अल्लाह की याद और नमाज़ की दावत की याद दिलाती है। लेकिन बहुत से लोग नहीं
जब अज़ान सुनो और ये अल्फ़ाज़ आए “हय्या अलस्सलाह” तो इन में से क्या कहना चाहिए? जवाब देखे »
हर मुसलमान की तमन्ना होती है कि वह रात के सुकून भरे लम्हों में उठकर तहज्जुद की नमाज़ अदा करे, लेकिन बहुत से लोग चाहकर
जो शख्स रात को तहज्जुद पढ़ने के लिए बेदार नहीं हो सके, तो वो कौन-सा अमल करे? जवाब देखे »
हर साल रमज़ान में यह सवाल ज़रूर उठता है कि सहाबा ने रसूल-अल्लाह ﷺ के साथ कितनी रात तरावीह अदा की थी। आइए इस मुकम्मल
सहाबा ने रमज़ान में रसूल-अल्लाह ﷺ के साथ तरावीह कितनी रात पढ़ी? जवाब देखे »
रमज़ान की रातें अल्लाह की रहमतों से भरी होती हैं। बहुत से लोग यह जानना चाहते हैं कि इन रातों में की जाने वाली नमाज़
रमज़ान की (रातों में) नमाज़ पढ़ने की फ़ज़ीलत क्या है? जवाब देखे »
रमज़ान का महीना सिर्फ बरकतों का नहीं बल्कि बेशुमार सवाब का भी मौसम है। अल्लाह तआला ने इस महीने के रोज़ों में इतनी बरकत रखी
रमज़ान के एक महीने के रोज़े कितने महीनों के रोज़ों के बराबर हैं? जवाब देखे »
रमज़ान का महीना रहमतों और बरकतों से भरा होता है। इस मुबारक महीने में हर नेकी और इबादत का सवाब कई गुना बढ़ा दिया जाता
रोज़े के दौरान मेडिकल ज़रूरतें कभी-कभी उलझन पैदा कर देती हैं—ख़ासकर इंजेक्शन, दवाई या इलाज के मामले में। एक आम सवाल यह है कि बेहोशी देने
रोज़ेदार अगर एनेस्थेटिक इंजेक्शन (बेहोश करने वाला इंजेक्शन) ले तो क्या होगा? जवाब देखे »
रमज़ान बरकतों और रहमतों का महीना है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि सिर्फ एक महीने के रोज़े कितने महीनों के रोज़ों के बराबर होते हैं? हदीस
रमज़ान के एक महीने के रोज़े कितने महीनों के रोज़ों के बराबर हैं? जवाब देखे »
रोज़ा सिर्फ़ भूख-प्यास सहने का नाम नहीं, बल्कि रूह की पाकीज़गी का सफ़र है।अल्लाह ने इसे एक ऐसे मक़सद के लिए फ़र्ज़ किया है जो
रोज़े का असल मक़सद क्या है? जवाब देखे »
अज़ान देना सिर्फ़ नमाज़ की पुकार नहीं, बल्कि इस्लाम की पहचान और ईमान की गवाही है। अल्लाह के रसूल ﷺ ने अज़ान देने वालों को
क़यामत के दिन सबसे लंबी गर्दन किसकी होगी? जवाब देखे »
अल्लाह तआला अपने बन्दों पर बेहद रहम करने वाला है। वह हर रात आसमान-ए-दुनिया की तरफ नुज़ूल फ़रमाता है और खुद पुकार कर रहमत के दरवाज़े खोल
क्या कभी आपने नमाज़ में ध्यान भटकते हुए या क़ुरआन की आयतें भूलते हुए महसूस किया है?ये भूलना सिर्फ़ लापरवाही नहीं — बल्कि एक ख़ास शैतान
नमाज़ में क़ुरआन भुला देने वाले शैतान का नाम क्या है? जवाब देखे »
नमाज़ मुसलमानों की सबसे अहम इबादत है, और इमामत यानी नमाज़ की क़ियादत करना एक बड़ी ज़िम्मेदारी है।लेकिन सवाल ये है कि लोगों में इमामत का हकदार कौन
रसूलअल्लाह ﷺ की हदीस के हिसाब से लोगों की इमामत का ज़्यादा हक़दार कौन है? जवाब देखे »
इस्लाम में जिलहिज्जा के पहले दस दिन (अशरा-ए-जिलहिज्जा) बहुत बरकत और फ़ज़ीलत वाले माने गए हैं।ये वो दिन हैं जिनमें अल्लाह तआला को नेक अमल और इबादतें
अशरा-ए-जिलहिज्जा का ज़िक्र क़ुरआन की किस सूरह में आया है? जवाब देखे »
नमाज़ सिर्फ़ सज्दा और रुकू का नाम नहीं, बल्कि एकता, अनुशासन और दिलों को जोड़ने का तरीका है। लेकिन नमाज़ की सफ़ में छोड़ी गई
हमारा दिन कई छोटे-बड़े कामों से भरा होता है, और इस्लाम ने हमारे हर छोटे काम को इबादत बनाने का तरीका बताया है। इसमें यात्रा
वह कौन सी दुआ है जो लफ़्ज़ “सुब्हान” से शुरू होती है? जवाब देखे »
हमारे दिल एक बहुत ही नाजुक और याद रखने-भूलने वाले अंग हैं। जिस तरह एक बहुमूल्य चीज को सहेजकर न रखा जाए तो वह खो
वो क्या है जो इंसानों के दिल से इस तरह निकल जाता है जैसे कोई ऊँट भाग जाता है? जवाब देखे »
हम अक्सर नमाज़ अकेले पढ़ लेते हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं कि अगर सिर्फ एक और व्यक्ति को साथ लेकर जमात बना ली जाए,
हिजरी कैलेंडर, या इस्लामी कैलेंडर, मुसलमानों के धार्मिक जीवन का केंद्रबिंदु है। इसके हर महीने का अपना एक अलग महत्व और फज़ीलत है। जब भी
हिजरी कैलेंडर का कौनसा महीना रमज़ान कहलाता है? जवाब देखे »
कुरआन न सिर्फ हमारे लिए हिदायत है, बल्कि यह हर तरह के बुरे प्रभाव और नुकसान से हमारी हिफाज़त का ज़रिया भी है। पैगंबर मुहम्मद