इबादत

नमाज़, रोज़ा, ज़कात और हज जैसे इबादत से जुड़े सभी सवाल और जवाब।

हर हफ्ते 2 दिन जन्नत के दरवाज़े खोले जाते हैं और उन सबकी मगफ़िरत हो जाती है जो शिर्क न करते हों और अपने भाई के खिलाफ़ कीना न रखते हों, वो 2 दिन कौनसे हैं?

हमारे हर हफ्ते में कुछ ऐसे दिन आते हैं जिनका इस्लाम में विशेष महत्व बताया गया है। इनमें से दो दिन ऐसे हैं जो हमें […]

हर हफ्ते 2 दिन जन्नत के दरवाज़े खोले जाते हैं और उन सबकी मगफ़िरत हो जाती है जो शिर्क न करते हों और अपने भाई के खिलाफ़ कीना न रखते हों, वो 2 दिन कौनसे हैं? जवाब देखे »

कौनसे अमल के लिए यह फरमाया कि जब तक तुम वो नहीं करोगे नेकी में कमाल हासिल नहीं कर सकते?

ईमान और नेकी एक ऐसा सफर है जिसमें इंसान लगातार अपने आप को बेहतर बनाने की कोशिश करता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि

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जो निकाह की ताक़त न रखता हो उसको क्या करना चाहिए?

शादी (निकाह) करना एक अज़ीम इबादत और सुन्नत है, जो इंसान को बहुत-सी बुराइयों से बचाती है। लेकिन क्या हो अगर कोई निकाह करने की

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नमाज़ की सफ़ों में अगर जगह (गैप) रह जाए, तो क्या नुक़सान होता है?

अक्सर हम मस्जिद में नमाज़ पढ़ते समय देखते हैं कि सफ़ों के बीच थोड़ा-बहुत गैप रह जाता है। यह छोटी-सी बात दिखने में मामूली लगती

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शब-ए-क़द्र में इबादत का सवाब कितना है?

रमज़ान की मुबारक रातों में एक रात ऐसी होती है जो इंसान की पूरी ज़िंदगी बदल सकती है—शब-ए-क़द्र। बहुत से लोग पूछते हैं कि इस

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मुँह या नाक से खून बहने से रोज़ा टूट जाता है?

रमज़ान के महीने में रोज़ा रखते वक्त बहुत से लोगों के मन में ये सवाल आता है कि —अगर नाक या मुँह से खून निकल आए,

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किसी रोज़ेदार को इफ़्तार कराने वाले को क्या सवाब मिलेगा?

रमज़ान के महीने में रोज़ा रखना सिर्फ़ भूख-प्यास सहना नहीं, बल्कि नेकी और इनाम कमाने का सुनहरा मौक़ा है।लेकिन क्या आप जानते हैं — अगर आप किसी

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जो निकाह की ताक़त नहीं रखता, उसे क्या करना चाहिए?

इस्लाम ने इंसान की फितरत और जरूरतों का पूरा खयाल रखा है। शादी (निकाह) इंसानी ज़िंदगी का अहम हिस्सा है — ये नफ़्स की हिफाज़त,

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रमज़ान की (रातों में) नमाज़ पढ़ने की फ़ज़ीलत क्या है?

रमज़ान की रातें रहमत, मग़फ़िरत और बरकतों से भरपूर होती हैं। इन रातों में की जाने वाली इबादत का सवाब कई गुना बढ़ा दिया जाता

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रमज़ान के महीने में क़ुरआन का नुज़ूल किस सूरह में आया है?

रमज़ान का महीना सिर्फ़ रोज़ों और इबादतों का नहीं, बल्कि यह वो मुबारक महीना है जिसमें क़ुरआन-ए-करीम का नुज़ूल हुआ — जो पूरी इंसानियत के लिए हिदायत और

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वो कौन-सा आसान अमल है जिसको करने से जन्नत के 8 दरवाज़े खोल दिए जाते हैं और इंसान जिस दरवाज़े से चाहे दाख़िल हो सकता है?

हर मुसलमान का सपना है कि वह जन्नत में दाख़िल हो। लेकिन क्या आप जानते हैं कि एक आसान अमल से जन्नत के सारे 8

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वो कौन सा ज़िक्र है जिसको 100 बार पढ़ने से 1000 नेकियाँ लिख दी जाती हैं और 1000 गुनाह मिटा दिए जाते हैं?

अल्लाह का ज़िक्र इंसान की ज़िंदगी को रोशन कर देता है। हर ज़िक्र का अपना सवाब और असर है, लेकिन कुछ अज़कार ऐसे हैं जिनके

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वो कौन सा अमल है जो हलााल तो है लेकिन अल्लाह तआला को सख़्त नापसंद है?

इस्लाम में बहुत सी चीज़ें हलााल हैं, लेकिन कुछ अमल ऐसे हैं जो अल्लाह तआला को पसंद नहीं हैं। क्या आप जानते हैं कि सबसे

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आहादीस के मुताबिक़ सबसे अफ़ज़ल दुआ कौन-सी है?

दुआ अल्लाह के साथ बंदे का सीधा रिश्ता है। लेकिन सवाल यह है कि सबसे अफ़ज़ल दुआ कौन-सी है? आइए, हदीस की रोशनी में इसका जवाब जानते

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दिन – ऐ – इस्लाम कब मुकम्मिल हुआ?

क्या आप जानते हैं कि इस्लाम का धर्म कब पूरी तरह मुकम्मल हुआ? यह जानना हर मुसलमान के लिए जरूरी है ताकि हम अपने आस्था और

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अल्लाह तआला ने इस उम्मत को खैर उम्मत से इस लिए नवाज़ा क्योंकि?

क्या आप जानते हैं कि अल्लाह ने मुसलमानों की उम्मत को सबसे बेहतरीन उम्मत क्यों बनाया? इसका मक़सद सिर्फ़ गर्व करना नहीं बल्कि लोगों तक नेक काम

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औरतों से निकाह किस चीज़ की बुनियाद पर करना सुन्नत है?

शादी का फैसला जीवन का सबसे महत्वपूर्ण कदम होता है।क्या आप जानते हैं कि निकााह में सबसे जरूरी आधार क्या होना चाहिए? सवाल: औरतों से निकाह

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Shab e Qadr Raat Ramzan Ashra

शब-ए-कद्र की मुबारक रात रमज़ान के कौनसे अशरे में आती है?

रमज़ान के महीने में एक ऐसी रात है जिसे “हज़ार महीनों से बेहतर” कहा गया है। यह रात बहुत ही मुबारक है क्योंकि इसी रात

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Sawal - Iman aur kufr ke darmiyan fark karne wali cheez

ईमान और कुफ्र के दरमियान फ़र्क करने वाली चीज़ क्या है?

इस्लाम में ईमान और कुफ्र दोनों ही एक-दूसरे के मुख़ालिफ़ हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि एक ऐसी ख़ास इबादत है जिसे छोड़ने को

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Isra meraj ke raat kya hua

इस्रा व मेराज का वाक़िआ मुसलमानों के लिए ख़ास है, क्योंकि इसी रात –

इस्लामी इतिहास में कुछ ऐसे वाक़ये हैं जिनकी अहमियत बहुत ज़्यादा है, और इस्रा व मेराज उनमें से एक है। यह एक ऐसा अनोखा सफ़र

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Ramzan ke aakhri 10 ki ibadat ko kya kehte

रमज़ान के आख़िरी 10 दिनों में कौन-सी ख़ास इबादत की जाती है?

रमज़ान का महीना अपनी बरकतों और रहमतों के लिए जाना जाता है, लेकिन इसके आखिरी 10 दिन एक ख़ास तरीक़े की इबादत की जाती है।

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Surah fatiha ki namaz me ahmiyat

सूरह फ़ातिहा की नमाज़ में क्या अहमियत है?

नमाज़ इस्लाम की सबसे ज़रूरी इबादत है, और इसमें क़ुरान की एक ख़ास सूरह पढ़ने का हुक्म है। इस सूरह के बिना नमाज़ मुकम्मल नहीं

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Islam ka wo Hukm jo Maaldar ki madad karne ko kehta

इस्लाम का वो कौन सा हुक्म है जिसमें मालदार शख़्स अपने माल से ग़रीबों की मदद करता है?

इस्लाम के पाँच सबसे ज़रूरी फ़र्ज़ अमल में एक ऐसी इबादत है जो दौलतमंद लोगों को अपने माल का एक हिस्सा ग़रीबों और ज़रूरतमंदों को

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islami Calender roza mahina

इस्लामी कैलेंडर का वो कौन सा महीना है जिसमें मुसलमान रोज़े रखते हैं?

इस्लाम के पाँच स्तंभों में से एक है रोज़ा रखना। यह एक ऐसी इबादत है जिसे हर मुसलमान, जो सेहतमंद हो, एक ख़ास महीने में

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Zakaat ka asal maksad

इस्लाम में ज़कात का असल मक़सद क्या है?

इस्लाम के पाँच स्तंभों में से एक ज़कात है, जिसे हर साहिब-ए-निसाब (जिसके पास ज़रूरी माल हो) मुसलमान पर फ़र्ज़ किया गया है। लेकिन, क्या

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Ramzan Raat Quran Nuzool

रमज़ान के महीने की वह बरकत वाली रात कौन-सी है जब कुरआन नाज़िल हुआ?

रमज़ान का महीना अपनी बरकतों और रहमतों के लिए जाना जाता है, लेकिन इस पाक महीने में एक ऐसी रात है जिसकी अहमियत हजारों महीनों

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“एक दाने को सात बाली निकले और उन हर बालीयों में से सौ-सौ दाने निकले” – यह मिसाल अल्लाह ने कुरान में किन लोगों के ताल्लुक से बयान की है?

क़ुरान-ए-मजीद इंसान को नेकियों के लिए तरग़ीब दिलाने के लिए कई जगह बेहद खूबसूरत मिसालें देता है। उनमें से एक मिसाल है – एक दाने से

“एक दाने को सात बाली निकले और उन हर बालीयों में से सौ-सौ दाने निकले” – यह मिसाल अल्लाह ने कुरान में किन लोगों के ताल्लुक से बयान की है? जवाब देखे »

क्या बीवी शौहर को ज़कात दे सकती है?

ज़कात इस्लाम का एक अहम फ़र्ज़ है और इसकी अदायगी का सही तरीका जानना हर मुसलमान के लिए ज़रूरी है। अक्सर घरों में यह सवाल

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रोज़े का असल मक़सद क्या है?

रमज़ान का महीना बरकतों और रहमतों से भरा हुआ है। लेकिन रोज़े का असल मक़सद सिर्फ भूखे-प्यासे रहना या इफ़्तार की दावतें करना नहीं है,

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रोज़ा किसके लिए रखा जाता है?

इस्लाम में रोज़ा एक इबादत है, लेकिन इसका मक़सद और निशाना साफ़ तौर पर अल्लाह तआला की रज़ा हासिल करना है। रोज़ा दिखावे या रस्म

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